
डिण्डौरी विश्व बंधुत्व की प्रेरणा दात्री भारतीय संस्कृति धरोहर की गरिमा शालिनी देव सलिला पावन पुनीत सुचिता शिव पुत्री मैकलसुता मां नर्मदा नदी के प्राकृतिक पावन तट पर स्थित उपनगरीय क्षेत्र में स्थित शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार की स्वायत्त संस्थान नवोदय विद्यालय समिति क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल मध्य प्रदेश के दिशा -निर्देशन में शिक्षाविद् प्राचार्य डॉ हर्ष प्रताप सिंह के कुशल नेतृत्व में पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय धमनगांव डिंडोरी (म.प्र.) में नारियों के मुक्तिदाता, आधुनिक भारत के मनु , संविधान शिल्पकार , संविधान निर्माता, बत्तीस डिग्री धारक सिंबल आफ नालेज, नौ भाषाओं के ज्ञाता , कोलम्बियाविश्व विद्यालय से डॉक्ट्रेट, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से डाॅक्टर आफ साइंस, महान अर्थशास्त्री, शिक्षाविद् , भारत की पहले कानून मंत्री, कानूनविद, रिजर्व बैंक आफ इंडिया के विचारक , बौद्ध दर्शन के ज्ञाता , समाज सुधारक, चिंतक, दलितों के रक्षक, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी की जयंती चौदह अप्रैल को बड़े धूमधाम से मनाई गई।
सर्वप्रथम विद्यालय के शिक्षाविद् प्राचार्य महोदय डॉ हर्ष प्रताप सिंह, उप प्राचार्य अलका विश्वकर्मा, धर्मेंद्र सोनकर , के एल महोबिया पी जी टी हिंदी ने डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के छायाचित्र में धूप-दीप माल्यार्पण और पुष्पार्पण किया गया।
तत्पश्चात् विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा करमा नृत्य, कत्थक नृत्य प्रस्तुत किया । कार्यक्रम की अगली कड़ी में शिवहरि, यश, अमित कुमार , त्रिभुवन मार्को , राखी पूषाम एवं आस्था गवले ने पर अपने विचारों के माध्यम से बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के विचारों पर अपने विचार प्रकट किये।
विद्यालय के शिक्षकों की ओर से पीजीटी हिंदी के. एल. महोबिया ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर स्वरचित कविता ” मैं बाबा साहब का संविधान हूं ” के माध्यम से बाबा साहब के कार्यों और संदेशों से नवीन भारत की संरचनात्मक महत्व से अवगत कराया। इससे साथ प्रवक्ता अंग्रेजी धर्मेन्द्र सोनकर डॉ भीमराव अंबेडकर के जीवन पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए बताया कि बाबा साहब ने कहा था कि “शिक्षा शेरनी का दूध है जो पियेगा वो दहाड़ेगा” दलित वर्ग के लिए शिक्षा के महिलाओं के लिए प्रसूति अवकाश, दैनिक कार्य की घंटे का निर्धारण, रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया की स्थापना, स्त्रियों और पिछड़े वंचित वर्गों के लिए शिक्षा के अधिकार ही नहीं समूची मानव जाति के उत्थान के लिए कार्य किया है भारत की अधोसंरचना बाबा साहब के बिना अधूरा अकल्पनीय है।
बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर हिंदी लेखन कार्यशाला का आयोजन किया गया सर्वप्रथम प्राचार्य शिक्षाविद हर्ष प्रताप सिंह ने डिंडोरी नगर से पधारे अतिथिद्वय वक्ता शिक्षाविद् सेवानिवृत प्राचार्य डॉ प्रताप सिंह चंदेल, चंद्र विजय महाविद्यालय डिंडोरी मध्य प्रदेश , प्राचार्य बिहारी लाल द्विवेदी मैकलसुता महाविद्यालय डिंडोरी मध्य प्रदेश सदस्य हिंदी ग्रंथ अकादमी को पुष्प कुछ देकर स्वागत किया गया।
हिंदी लेखन कार्यशाला में डॉ प्रताप सिंह चंदेल ने बताया कि वे प्राथमिक शिक्षक, माध्यमिक, उच्च माध्यमिक शिक्षा उच्च शिक्षा में प्राध्यापक के रूप में शिक्षण कार्य किया है। छात्र -छात्रों को प्रेरित करते हुए बताया कि कविता कहानी एकांकी नाटक डायरी पत्र वार्ता रिपोर्ताज आत्मकथा लिखने के लिए सरल सरल एवं छोटे छोटे शब्दकोश के माध्यम से लेखन कार्य किया जा सकता है । लेखन कौशल को बताते हुए उन्होंने सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता झांसी की रानी, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता वह तोड़ती पत्थर, अकाल और उसके बाद ” बहुत दिनों तक चूल्हा रोया चक्की रही उदास” कविता के माध्यम से छात्रों को भाषा कौशल के विकास के लिए उत्प्रेरित किया।
कार्यशाला के दूसरे वक्ता के रूप में डॉ बिहारी लाल द्विवेदी ने शिक्षा छात्रों को नाटक एकांकी कविता लिखने के लिए शब्द चयन, अलंकार , छंद , भाषा के ज्ञान को बताते हुए लेखन कौशल को स्पष्ट करते हुए कहा कि किस प्रकार के शब्दों का चयन किया जाना चाहिए वर्तमान समय में आवश्यकता किस प्रकार के लेखन की है हिंदी लेखन से आजीविका के स्रोत क्या है हिंदी लेखन क्यों किया जाना चाहिए आदि विषयों पर विस्तृत प्रकाश डाला।
कार्यक्रम आयोजन की व्यवस्था पुष्पा पटेल और फोटो ग्राफी योगेश्वर वर्मा जी द्वारा किया गया एवं मंच संचालन विद्यालय के छात्र रिंकू झारिया और रिद्धि साहू द्वारा किया गया।
हिंदी कार्यशाला कार्यक्रम का आभार व्यक्त करते हुए उपप्राचार्य अलका विश्वकर्मा ने कहा कि हिंदी भाषा कार्यशाला से हमारे विद्यालय के छात्र छात्रों ने लाभान्वित हुए हैं जिससे वह हिंदी लेखन कौशल को आगे बढ़ाएंगे साथ ही यह कहा कि अतिथिद्वय का भविष्य में विद्यालय को योगदान देने की बात कही।
डॉ बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर विद्यालय के शिक्षक योगेश्वर वर्मा, ओम प्रकाश शुक्ला , उमाशंकर , मंगल सिंह मीणा , आमीनुल इस्लाम , सरकार , मदन, अनुपमा पी सुंदरम , उमाशंकर , संचिता बनर्जी, आभा बोरकर , कविता, वंदना दुबे , मधुवंत राव , प्रवीण कुमार , सुमित, राहुल कुमार , रोहित धुर्वे तथा अन्य शिक्षक – शिक्षिकाओं के साथ विद्यालय के छात्र छात्राओं की उपस्थिति गरिमापूर्ण रही